योगी है सबसे बड़ा ढोंगी क्यों कि यदि सन्यासी~योगी के पास मोबाइल हैं कार है बंगला है और सरकार से दी गई हेलीकॉप्टर की भी सुविधा है तो सावधान रहें वो कोई सन्यासी~योगी नही है। वो केवल बहुत बड़ा पखंडी और लालची है

रियल लाइफ लेखन के द्वारा उत्तर प्रदेश के लोगों की बदहाली इस कविता में वया की गई सारी उत्तर प्रदेश में उपजे तारन हारी जैसे श्री राम, राधे संग कृष्ण मुरारी और यही पर पनप रहे हैं पाप अति भारी सदियों से इन अछूतों के मंदिर के अंदर जाने पर रोक लगाई गई अभी भी है जारी अछूतों को जूते खाने की आदत हो गई भाई ये बाबा साहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर एकलव्य, और रविदास जी की पूजा छोड़ पत्थर के बुत को छप्पन भोग चढ़ाई जिन बाबा साहेब ने इनको जीने, पड़ने और बड़ी-बड़ी नौकरी करने का अधिकार दिलाया उन्हीं की एक तस्वीर इनके घर नहीं मिलती मां, बहन, बेटी, पत्नी, उत्पीड़न और बलात्कार जैसी घटनाएं रहती जारी पर्दा प्रथा के अंदर घुट रही है हर नारी यहां के नेता पाले खूनी, गुंडे, अपराधी खुलेआम ये अपराध करते है अपराधी नेता बनते हैं बलात्कारी, गुंडे, भ्रष्टाचारी स्कूल, कॉलेज, कारखाने की बजाय यहां भव्य मंदिर का निर्माण है जारी जहां पर रहते हैं जी पंडित बलात्कारी यहां जनता बड़ी भारी अंध विश्वासी बिना पूछे पंडित जी से नहीं हैं करती खुद से पैदा किए बच्चों के नामकर्ण, शादी देश की प्राइवेट, सरकारी, अर्धसरकारी सारी नौकरी निजीकरण में दे डारी यहां फैलीं है ग़रीबी और बेरोजगारी भूखमरी यहां पर पूर्ण रूप से है छायी बेबस होकर मुम्बई, गुजरात, दिल्ली जाने को मजबूर हैं गरीब जनता सारी घने जंगलों के और पेड़ पौधे की कटाई ठेकेदारों से दलाली खा-खाकर करा डारी जिससे बे मौसम वर्षा और सूखा है जारी वर्षा के ना होने से अन्न, जल की जननी धरती मां भी है बर्षो से सूखी पयासी कहां से देती अन्न, जल और हरियाली चुनाव के समय जनता की नब्ज को छूने वाली बाते बनाते हैं नेता जी वैसे गरीब जनता इनको नजर नहीं आती लोगों के पैरों पर गिर कर हांथ जोड़ कर सौ झूठे-सच्चे वादो का लोलीपॉप देकर भोली सूरत में वोट मांगने आते हैं नेता जी जाति-धर्म का भेद-भाव फैला कर तो कभी ऊंच-नीच का हवाला देकर भोली जनता को लड़वाते है नेता जी यहां कुछ एक के घरों में ही अमीरी छायी डाॅ, नेता, अभिनेता, ढोंगी बाबा, व्यापारी बाक़ी तो भूखों मर रही है जनता बेचारी जब तक जाति-धर्म और ऊंच-नीच की सियासत में पड़ी रहेगी जनता सारी तब तक यही रियल लाइफ रहेगी भाईयों हमारी

जो प्यार आप GF या BF बनाकर उनको देते हो वही प्यार आप बीवी या पति को दे कर देखो ! यकीन मानिए इतने खुश और सफल होंगे आप कि जितनी आपने उम्मीद भी नहीं की होगी कभी।।

बिखरे रिश्तों की किताबों पर बेशक नया कवर चढ़ाइये ,लेकिन बिखरे रिश्तों के पन्नों को पहले प्यार से चिपकाइये।।

एक दौर वो था जब हम दोनों के बीच सिर्फ शब्द नहीं होते थे साथ में प्यार भी था और अब वो दौर है जिसमें हम दोनों के बीच सिर्फ अपशब्द हैं प्यार के तो कहीं निशान भी नहीं रहे

Modi Ke karnamo se feili hai Har Ghar mein matam mayusi Or pareshan ho rahi hai Bharat ki janta saari Isi liye ……… Supreme court se hai Desh vasiyon ki appeal Modi sarkar ko hatao Garibon ko bachao Saja sunao inn logo ko Umar keid karavas ki Sas lene ko tadfe ye Jeene ki na rahe aas bhi Corona ki aad mein inhone Sab logo ki Roji roti chhini Sabki sarkari nokari chhin Amiron ko nijikaran karwa Rahe hai modi……….. Bank, hospital, university, Railway station, rail nokri, ITI college aadi bech dini Ayodhya mein mandir hatao Uski jagah karkhane banbao Modi or yogi dono Huye hai mansik rogi Inki puri sarkar hatao Ham garibon ko inse bachao Aaj ke yuvaon ka ye Kar rahe jivan barbad Sath lapate mein aaye Sab sarkari nokari baaj Apne hi desh mein Bana rahe hai ye Ham sab ko chand Amiron ka gulam Le aaye ye angrejo Ki si firse hukmaran Desh ki sari sarkari Nokari or companiyon Ko nijikaran mein dekar Na jane kitne parivaron Ke khun hai inke sar par Inki hi bajah se kaiyon ki shadi bhi Ban gayi barbadi Ladki ki shadi ke liye Sarkari nokari wale Ladkon ka pada akaal Jaha dahej mein das lagte the Vahan ab ye mang rahe hai das laakh

Supreme court se hai Desh vasiyon ki apeel Modi sarkar ko hatao Garibon ko bachao Saja sunao in logo ko Umar keid karavas ki Sas lene ko tadfe ye Jine ki na rahe aas bhi Corona ki aad mein inhone Sab logo ki Roji roti chhini Sabki sarkari nokari chhin Amiron ka nijikaran kar dono Bank, hospital, university, Railway station, rail nokri, ITI college aadi bech dini Ayodhya mein mandir hatao Uski jagah karkhane banbao Modi or yogi dono Huye hai mansik rogi Inki puri sarkar hatao Ham garibon ko inse bachao Aaj ke yuvaon ka ye Kar rahe jivan barbad Sath lapate mein aaye Sab sarkari nokari baaj Apne hi desh mein Bana rahe hai yeh Ham sab ko chand Amiron ka gulam Le aaye ye angrejo Ki si firse hukmaran Desh ki sari sarkari Nokari or companiyon Ko nijikaran mein dekar Na jane kitne parivaron Ke khun hai inke sar par Inki hi bajah se kaiyon ki shadi bhi Ban gayi barbadi Ladki ki shadi ke liye Sarkari nokari wale Ladkon ka pada akaal Jaha dahej mein das lagte the Vahan ab ye mang rahe laakh

मोदी मानसिक रोगी, नोन रोटी खाओ बे; और फिर से.. इन्हीं को जिताओ बे, रोड पर आ जाओ बे, अब रोड से हटकर, सब भाड़ में जाओ बे, क्यों की हम; अब, रोड भी बेच देगे बे

हाॅस्पिटल में COVID-19 के ईलाज का चार्ज डाॅक्टर 5 Star हाॅटेल से भी ज्यादा ले रहे है और तो और डाॅक्टर जिंदा मरीज का पोस्टमार्टम करके मरीज़ के अंदर से गुर्दा (kidney) जैसे अंग निकाल कर मृत घोषित कर देते हैं 😡😡

भविष्य में में अगर आप लोग प्रकृति को शुद्ध देखना चाहते हैं तो सबसे पहले भ्रष्ट नेताओं और डीजल, पेट्रोल से चलने वाली गाड़ियों का वहिष्कार कीजिए

Aaj kal kuchh akeli si pad gayi huBahar se khush hu par ander se…Ander se puri tarah bikhar gayi huSamjh nahi aata kya karoo..Ab kisi par bisvas bhi nahi hotaKisi ke chehre se saf bhi nahi hotaKi kon sachcha hai kon nahi…Jivan bhar ke karmo ki …..Parchhai Ne bhi sath na nibhayaBure bakt mai koi bhi kaam na…….

बंदूक से भी ज्यादा घातक जातिवादियों के विचार होते हैं, बंदूक देना जितना आसान है बुद्धि देना उतना ही कठिन है, दुनियां में कोई भी जंग बिना बुद्धि के नहीं जीती जा सकती.!

संबंध कभी भी सबसे जीतकर नहीं निभाए जा सकते… संबंधों की खुशहाली के लिए झुकना होता है, सहना होता है, दूसरों को जिताना होता है और स्वयं हारना होता है

Yun tera aana najre Milana Najre churakar fir sharmana Sharma kar gale lag jana Lagkar gale baho mai simat jana Fir hole hole se mushkana Meri baho se chhut dur chhup jana Bas yahi ada teri katil hai Jispar jane jaa mai marta hu Jan hatheli par liye firta hu Bas Teri ek jhalak dekhne ko Jaan Dar ba dar bhatakta hu Tujhe chhoo lene ko jane mn tarasta hu

दुनिया का सब से हसीन और खूबसूरत तोहफा ये मेरे दोस्त मुझे तूने दिया अपना दोस्त बना कर मेरे दोस्त तू सदा सलामत रहे तेरे सलामत रहने से ही हमारी दोस्ती भी हमेशा सलामत रहेगी

India mein Ek law aesa hona chahiye ki desh ka leader agar desh ki janta ki berojgari or unki taklifon ka sochkar fesla na le to uss leader ko uske karyekal ke samay se pehle hatane ka power janta ko hona chahiye Desh ki janta ki raay online voting karwa kar lee jani chahiye

बुखार को खत्म करने के लिए-मैथी दाना 35 से 40 के लगभग, एक चुटकी हल्दी, आधा इन्च दालचीनी, और एक छोटा टुकड़ा अदरक को कूटकर एक गिलास पानी में उबाल कर चाय की तरह गुनगुना सुबह, शाम और फिर सुबह पीने से बुखार पूरी तरह खत्म हो जाएगा।

बुखार को खत्म करने के लिए-मैथी दाना 35 से 40 के लगभग, एक चुटकी हल्दी, आधा इन्च दालचीनी, और एक छोटा टुकड़ा अदरक को कूटकर एक गिलास पानी में उबाल कर चाय की तरह गुनगुना सुबह, शाम और फिर सुबह पीने से बुखार में पूरी तरह खत्म हो जाएगा।बुखार को खत्म करने के लिए-मैथी दाना 35 से 40 के लगभग, एक चुटकी हल्दी, आधा इन्च दालचीनी, और एक छोटा टुकड़ा अदरक को कूटकर एक गिलास पानी में उबाल कर चाय की तरह गुनगुना सुबह, शाम और फिर सुबह पीने से बुखार पूरी तरह खत्म हो जाएगा।

कोरोना वायरस में आपका इंटरेस्ट भले ही कम हो गया हो लेकिन.. कोरोना वायरस का इंटरेस्ट आप में बढ़ता ही जा रहा है..

अगर लाॅकडाउन से प्रकृति शुद्ध हो सकती है तो भ्रष्ट नेताओं के बहिष्कार से भारत की पूरी संस्कृति शुद्ध होने के साथ-साथ जाति धर्म का भेद-भाव ही खत्म हो सकता है

मर्दों की बातें बड़ी मीठी-मीठी होती है अगर कोई लड़की इनकी बातों में आ जाएं तो वो लड़की समाज में सर उठाने लायक़ नहीं रहती

ना मुमकिन कुछ भी नहीं हर मुश्किल का हल होता है आज नहीं है पर कल होता है कभी आंसू मत बहाना दोस्तों क्यों कि आंसू का हरेक मोती गंगा जल जितना पवित्र होता है

मेरे हुजरे में नहीं और कहीं पर रख दो, आसमां लाएं हो ले आओ जमी पर रख दो। अब कहां ढूंढने जाओगे हमारे क़ातिल, आप तो कत्ल का इल्ज़ाम हमीं पर रख दो। मैंने जिस ताक पे कुछ टूटे दिए रखें है, चांद तारों को भी ले जा के वहीं पर रख दो।

Kisi ne thik hi kaha hai ki Kabhi kisi ajnabi par yakin mat karna Kabhi kisi ajnabi ke sath Sachche rishte ki niv kabhi mat rakhna Kyonki Tumari taraf se badaye gaye dosti ke hath koLog tumhari garj samajh lete hai Isliye apne dard ko kisi se apna samjh kar mat kahana

ना मुमकिन कुछ भी नहीं यारों हर मुश्किल का हल होता है आज नहीं है पर कल होता है कभी आंसू मत बहाना दोस्तों क्यों कि आंसू का हरेक मोती गंगा जल जितना ही पवित्र होता है

इन बेवफा पतियों पे भी कोई; बड़ा सा टेक्स लगा दो यारों, हमारे दिल-अरमान तोड़ने; वालों का मुनाफा घटा दो यारों, किसी की दो-दो पत्नी हैं तो; किसी की कई-कई है गर्लफ्रेंड, इन पतियों के फरेबी इश्क को; आधार कार्ड से लिंक करा दो य़ारों, ये अपने ही घर-परिवार की; ज़िम्मेदारियों से मुकर ना पाएं, इनकी फरेबी लाइफ को; हाउस वाइफ जैसा बना दो यारों, बच्चे पैदा करने, रिश्ते निभाने और; घर सम्हालने की जिम्मेदारी हो इनकी, जज से ऐसी कड़ी- कठोर; सजा इनको भी दिला दो यारों!!!

किसी ने ठीक ही कहा है कि जिंदगी वही जो औरों के काम आए जिंदा दिल वही जो औरों को हंसाए और जिगर वाला वही जो जख्मों का हिसाब चुकाए

चुभने लगे हैं दिखावे के और झूठे रिश्तों के एहसास पल-पल मारतें हैं लहज़े उनके बात करने के अंदाज ये जिंदगी का सफर भी ऐसा ही हुआ है कि अब यहां गैरों से तो क्या हम अपनों से ही हारे हुए हैं आज

औरत को बिस्तर पे लाने के लिए कोई हराम खोर जाति धर्म नहीं देखता, और शादी के लिए बोलो तो साले सभी जाति धर्म ढूढने लगते हैं!!😡 दोगला समाज साला 🤬🤬🤬

कभी कीजिए तो कोशिश मुझे याद करने की; फुर्सत के लम्हे तो खुद-ब-खुद निकल आएंगे; तुम्हारे दिल में है अगर चाहत मुझसे मिलने की; तो बहाने मिलने के अपने आप ही बन जायेंगे।

दुनिया में हर चीज मिल जाती बस, कभी अपनी खुद की गलती नहीं मिलती… कच्चे कान और सकी दिमाग, कभी भी किसी का घर बसने नहीं देते… हर काम में टोक और हर बात में खोट, कभी शैतान को इंसान बनने नहीं देती… पैर की मोच और छोटी सी सोच, कभी किसी को आगे बढ़ने नहीं देती… टूटी हुई कलम और औरो से जलन, कभी किसी को अपना भाग्य लिखने नहीं देती… काम का आलस पैसो का लालच, कभी किसी को महान बनने नहीं देता…

मुझे जो ज़ख्म दिए हैं तुम ने, वो ज़ख्म ना जाने क्यों भरते ही नहीं, चाहते तो हम भी हैं कि अब न मिलें, मगर ये जो दिल है कमबख्त कुछ भी समझता ही नहीं

दिल को छूने वाली बात कहते हैं हम, अगर आपको सही लगे तो शेयर करें। क्या मंदिर, मस्जिद और क्या गुरूद्वारे, बेजुबान पत्थर के बुत, कब्र है ये सारे। करोडो के गहने रुपए हीरे-जवाहरात, लोग दिल खोल कर इनको है चढ़ाते। उसी दहलीज पे दाने दाने को तरसते, नन्ने हाथ फैलाए जवा से बूढ़े हो जाते। सजे रहते हैं छप्पन भोग, मेवे, मिठाई, पत्थर की मूरत और चबूतरों के आगे। और इनके बाहर हर एक फ़कीर को, भूख से तड़प-तडप के मरते देखा है। लदी हुई हैं रेशमी चादरों से हरी मजारे पर बाहर, एक बूढ़ी अम्मा को ठंड से ठिठुरते देखा है। वो जो दे आते हैं लाखों रुपए जेवर, शिरडी और तिरूपति गुरूद्वारे में। उसको घर में हजार पांच सौ रूपये के लिए, काम वाली बाई को बदलते देखा है। सुना है चढ़ा था सलीब पे कोई, सारी दुनिया का दर्द मिटाने को। आज उसी चर्च में बेटे की मार से बिलखते, सिसकते माँ – बाप को हमने देखा है। दिल से जलाती रही जो अखन्ड ज्योति, देसी घी की दिन रात की बनी पुजारन। आज उसे प्रसव में कुपोषण के कारण, एक-एक पल मौत से लड़ते देखा है। जिसने न दी माँ बाप को भर पेट रोटी कभी जीते जी, मां बाप के मरने के बाद पुरखों को पानी देते देखा है। आज लगाते हैं जो भंडारे शामियानों में, दरवाजे पे पड़े मां बाप को बिलखते देखा है। दे के समाज की दुहाई ब्याह दिया था जिस संग, अपनी लाडली बेटी को जबरन बाप ने। आज पिटते घसिटते बेइज्जत होते, उसी शौहर के हाथो सरे राह देखा है। मारा जाए वो पंडित बे मौत, सड़क दुर्घटना में यारो जो। मेरी हाथों की लकीरो का, भगवान बनके बैठा है। बन्द कर दिया पकड़ना सांपों को, सपेरे ने भी यह कहकर कि अब। अब इंसान ही इंसान को डसने का, काम सांपों से अच्छा करने लगा है। आत्म हत्या कर ली गिरगिट ने भी, ये सुसाइड नोट छोडकर कि अब। इंसान से ज्यादा रंग बिरंगे रंग तो, अब मैं भी नहीं बदल सकता हूं। गिद्ध भी चले गए उन्हें लगता है, इंसान हमसे ज्यादा अच्छा नोंचता है। जिस घर की एकता की मिसाल देता था जमाना, आज उसी आँगन में खिंचती दीवारों को देखा है।

बहती हुई नदी सी है ये मेरी जिंदगी, जो ना जाने कहां-कहां से बहकर जाती हूं। शहर-शहर गांव-गांव झाड़ियों और जंगलों से घूमती सागर से मिल जाती हूं। सागर की उठती लहरों के संग पवन के झोंकों सी आसमां को चूम आती हूं। आसमां के रंगों में रंग मेरा घुल मिल कर वरखा की वारिस बन जमीं पर आ जाती हूं। बहती हुई नदी सी है ये मेरी जिंदगी, जो ना जाने कहां-कहां से बहकर जाती हूं।

वो ना जाने किन किन निगाहों से रोज ही दो चार होती है, औरत तो ताउम्र ही औरों के लिए ग्लेमर का अखबार होती है। औरत माँ, बहिन, पत्नी, बेटी, बहू, और दोस्त बनकर, ना जाने कितने किरदारों की जिम्मेदारी दिल से निभाती है। ऑफिस ,घर, परिवार और बच्चों की सारी तकलीफें, चुप कर के सह जाती है उसे उफ़ तक ना करनी आती है। वो अपने ही घर में एक नींव का पत्थर हो जैसे, ऐसे सब दुख दर्द सहने की वो आदि हो जाती है। खामोशी की मुस्कान से आंखें बोला करती है, वो खुद बीमार होने के बाद भी सबकी चिंता करती हैं। अपने हिस्से का सारा सुख वो अपनों पर लुटाती है, इसी लिए औरत हमेशा त्याग की मूर्ति कहलाती है।

दोस्तों वो लम्हा बहुत खूबसूरत होता है जिसमें आप अपनों के बीच अपनापन और अपनों का प्यार महसूस करते हैं

काश तुम कभी मुझसे पूछते कि तुम मेरे क्या लगते हो, तो मैं तुम्हें गले लगाके कहता कि तुम ही मेरे सब कुछ हो

भगवान ने दौलत भले ही अमीर और गरीब में बराबर ना वाटी हो परन्तु आंसुओं को सब में बराबर बांटा हैं फिर चाहे वो कोई अमीर हो या गरीब

कभी दहकता कभी सुलगता, अंगारों सा काजल आंखों में लाल अगन सी जलती लाली, शोला सा भड़काए सांसों में जब जब भी मैं करवट बदलू, खाली पलंग चुभे वाहों में तब तब भी मैं रास्ता देखूं , रोकूं सिसकी आंसू आंखों में तुझ से जुदाई की पीड़ा में, मैं कभी सो ना पाऊं रातों में तेरे दरश र्को तरसे अखियां, चौक जाऊ मैं हर आहट में अब तो आजा तू ओ बेदर्दी, बैरागी हो जाऊं तेरी बातों में

बर्षो बर्ष चाहता रहा जिसे इश्क मुश्क पाने में एक ज़माना बीता यही हाल-ए-दिल बताने में इसी तरह बर्षो बरस बीत गए मिलन के इन्तजार में अब जाकर आए वो गए हुस्न की बहार में और अब उनकी जवानी इक ढलती हुई शाम है इश्क और प्यार का हमको जुकाम है

तू इंसान नहीं तू नारी है हरपल किस्मत की मारी है तुझे हर कोई ठुकराता है अपना भी नहीं अपनाता है फूलों सा तोड़ा जाता है मां बहन बेटी बनकर तूने त्याग किए अति भारी है तू हरपल किस्मत की मारी है यहां पत्थर को पूजा जाता है और तुझे इंसान इंसान के चरणों में चढ़ाता है और तुझे कोठों की रोनक बनाता है तो तू कभी किसी घर की फुलबारी है तू हरपल किस्मत की मारी है

जीवन में किसी भी प्रकार के संकट या अनहोनी के समय रोना या दुखी होना और फिर समय के साथ भूल जाना यही क्षमता व योग्यता इंसान को समझदार, सुखी और स्वस्थ जीवन व्यतीत करने में मददगार है , वर्ना जीवन में निराशा और अंधकार ही रह जाता, कभी भी आशा, प्रसन्नता या जीने की इच्छा नहीं होती।

Socha tha dosti na karu par ho gayi Fir socha dosti zahir na karu par kar diye Ab wo bhaw khate hai or mujhe chhod jaate hai Meri kami ye hai ki mujhe unke bagair jina nahi aata Be rang si ho gayi hai yeh zindagi Lakhon rang hai yaha par Mujhe tere bager sirf black or white hi nazar aata

जिंदगी एक ऐसा आईना है कि जीवन की जो तस्वीर हमको दर्पण में भी दिखाई नहीं देती वो हमें जिंदगी दिखा देती है

भाग्य और समय जीवन के दो पहलू हैं ये दोनों हमेशा साथ चलते हैं और इन में एक दिन बदलाव जरूर आता है कभी बहुत अच्छा तो कभी बहुत बुरा इसलिए इन दोनों पर कभी भी गुरुर मत करो ये जिंदगी एक सफर है और हम इसके मुसाफिर इस राह में बहुत सारे मोड़ आते हैं जहां हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है और इसी सफर में हमें अच्छे, बुरे, अपने, पराये, सच, झूठ, सही, गलत की भी पहचान होती है

Ham jab bhi udas hote hai to apna mn bahlane ke liye Gam ko pite hai or nafrat ko khate hai Or akelepan ke boyfriend ke sath rahte hai Wo bat alag hai ki wo mere sath akela rahna pasand nahi karta to wo apni Tanhaai naam ki girlfriend ko sath rakhta hai jo meri sabse badi sautan hai

छीन लिया मेरा बचपन कुछ हुस्न के ठेकेदारो ने बाजारों की रंगीन महफ़िलो में लाने वाले दलालों ने जब से लाया गया है हर रात हुस्न की नुमाइश होती है बोली लगाने वालों में समाज सेवी और पैसे वादी होते हैं इस दल-दल से निकलने की रोज मिन्नतें करतीं हूं फिर भी हर रात एक रात की नए मेहमान की दुल्हन बनती हूं काश पहले दिन ही कोई भईया या सईयां मिला होता तो मैं भी किसी इज्जतदार की बहन और बीवी होती यूं ना रोज रात की रंगीनियों में मैं नंगा नाच नाची होती ना जाने कितनो के द्वारा चूमे चूसे शरीर और चेहरे पर नकली हंसी की रोनक लेकर लोगों का दिल बहलाने वाली अन्दर से यूं ना मर मर कर मैं जियी और ना मरी होती जब झांकी मन झरोखों से दुनिया की भीड़ में तो मुझे मेरे गुनहगारों की लम्बी कतार नजर आती है गन्दी समाज के ठेकेदारों की भरमार नजर आती है रूठ गया मेरा बचपन और बिखर गई जवानी भी बुढ़ापे में सौ बीमारियां लेकर सड़ गई ये जिंदगानी भी ना कोई अपना मिला ना मिला कोई हमदर्दी देने वाला मिला तो इतना मिला भटकी हुई बहन बेटी और औरत का कोठों पर घुट घुट कर जीवन जीने का तजुर्बा मिला अपना घर और मां बाप जैसे भी हो उनके साथ जीवन बिताओ घर से भागने का ख्याल भी कभी ना अपने मन में लाओ

ये जिंदगी रंग एक मंच है; जिस पर हर इन्सान, अपना किरदार, निभाये चला जा रहा है। और ये जिंदगी; हर किरदार से भी बड़ी है, किरदार और लोग; खत्म हो जाते है, परन्तु जिंदगी नहीं, जिंदगी निरन्तर चलती रहती है चलती रहती है, चलती रहती है, चलती रहती है

एक स्त्री के पैरो के बीच से जन्म लेने के बाद उसके वक्षस्थल से निकले “दूध” से अपनी “भूख” प्यास मिटाने वाला इंसान बड़ा होते ही “औरत” से इन्हीं दो अंगो की चाहत रखता है…. और अगर असफल होता है तो इसी चाहत में घिनौने तरीककों से अंजाम देता है….. “बलात्कार” और फिर “हत्या”।। “जननी” वर्ग के साथ इस तरह की “मानसिकता” क्यूँ??? “वध” होना चाहिए ऐसी दूषित मानसिकता रखने वाले लोगों का…. “महिलाओं” के साथ इस तरह का “दुर्व्यवहार” इस दुनिया का सबसे नीच, गन्दा, शर्मनाक कृत्य है…… हर नारी की इज्जत करे ,,।