बचपन छोड़ जवानी में कदम रखना !इतना आसान कहाँ था गृहिणी होना ।।चलती कलम छोड़ झाडू घसीटना !खुद का बचपना छोड़ मां बनना ।।दूध, मक्खन, मलाई खाना छोड़ !मक्खन, घी के लिये बचत करना ।।सूट-दुपट्टे से उम्र के सम्बंध जोड़ना !मन बेमन ता उम्र साड़ी में घसिटना ।।भाई बहन से झगड़ना छोड़ !देवर नन्द का ख़्याल रखना ।।मात पिता की लाडली जिद्दी बिटिया !सास ससुर की डरी सहमी बहू बनना ।।कभी चुनरी खिसकने से संभालना !किताबें छोड़ घर गृहस्थी को पढ़ना ।।मज़ाक, मस्तियाँ भुलाकर चुप चुप रहना !बड़ी-बड़ी होने का सारी उम्र ढोंग करना ।।सखी-सहेलियाँ छोड़ दीवारों से बात करना !बुराईयों की झुमकियों का कानों पे बोझ ढोना ।।कोशिश कर एक एक फुल्का गोल सेंकना !हरवक्त घूंघट में खुद को गुनहगार समझना ।।अपनी पसंद छोड़ तुम्हारी पसंद को पहनना !हाथ की घड़ी उतार खनकती चूडियाँ पहनना ।।उड़ते आजाद कदमों की उड़ानों को !पायलों की बंदिशों की बेड़ियां पहनाना ।।तरह तरह के डिरेसिस पहनना छोड़ !खुद को घूंघट की दीवारों में समेटना ।।स्वादिष्ट भोजन की ख्वाहिशों को बर्तन में धोना !रोज कपड़ों के साथ सपने निचौड़ धूप में सुखाना ।।रोज सुबह जल्दी उठ अपनी फिक्र जिद छोड़ !सबकी छोटी बड़ी जरूरतों का ध्यान रखना ।।अपना अहम और मान-सम्मान को भुलाकर !सबकी अच्छी, बुरी सब सुनना और सहना ।।खुद के सुख-दुख भूख प्यास को भूल !सबके लिए नास्ता, लंच, डिनर बनाना ।।मैथ फिजिक्स के सवाल करना छोड़ !घर के सामान, दूध के हिसाब करना ।।इतना आसान कहाँ था गृहिणी होना !इतना आसान कहाँ है गृहिणी होना ।।Real Life❤️सभी घरेलू महिलाओं को समर्पित💙घर का आईना भी अब हक जताने लगा है !खुद तो वैसा ही है मेरी उम्र बताने लगा है ।।

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