रियल लाइफ लेखन के द्वारा उत्तर प्रदेश के लोगों की बदहाली इस कविता में वया की गई सारी उत्तर प्रदेश में उपजे तारन हारी जैसे श्री राम, राधे संग कृष्ण मुरारी और यही पर पनप रहे हैं पाप अति भारी सदियों से इन अछूतों के मंदिर के अंदर जाने पर रोक लगाई गई अभी भी है जारी अछूतों को जूते खाने की आदत हो गई भाई ये बाबा साहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर एकलव्य, और रविदास जी की पूजा छोड़ पत्थर के बुत को छप्पन भोग चढ़ाई जिन बाबा साहेब ने इनको जीने, पड़ने और बड़ी-बड़ी नौकरी करने का अधिकार दिलाया उन्हीं की एक तस्वीर इनके घर नहीं मिलती मां, बहन, बेटी, पत्नी, उत्पीड़न और बलात्कार जैसी घटनाएं रहती जारी पर्दा प्रथा के अंदर घुट रही है हर नारी यहां के नेता पाले खूनी, गुंडे, अपराधी खुलेआम ये अपराध करते है अपराधी नेता बनते हैं बलात्कारी, गुंडे, भ्रष्टाचारी स्कूल, कॉलेज, कारखाने की बजाय यहां भव्य मंदिर का निर्माण है जारी जहां पर रहते हैं जी पंडित बलात्कारी यहां जनता बड़ी भारी अंध विश्वासी बिना पूछे पंडित जी से नहीं हैं करती खुद से पैदा किए बच्चों के नामकर्ण, शादी देश की प्राइवेट, सरकारी, अर्धसरकारी सारी नौकरी निजीकरण में दे डारी यहां फैलीं है ग़रीबी और बेरोजगारी भूखमरी यहां पर पूर्ण रूप से है छायी बेबस होकर मुम्बई, गुजरात, दिल्ली जाने को मजबूर हैं गरीब जनता सारी घने जंगलों के और पेड़ पौधे की कटाई ठेकेदारों से दलाली खा-खाकर करा डारी जिससे बे मौसम वर्षा और सूखा है जारी वर्षा के ना होने से अन्न, जल की जननी धरती मां भी है बर्षो से सूखी पयासी कहां से देती अन्न, जल और हरियाली चुनाव के समय जनता की नब्ज को छूने वाली बाते बनाते हैं नेता जी वैसे गरीब जनता इनको नजर नहीं आती लोगों के पैरों पर गिर कर हांथ जोड़ कर सौ झूठे-सच्चे वादो का लोलीपॉप देकर भोली सूरत में वोट मांगने आते हैं नेता जी जाति-धर्म का भेद-भाव फैला कर तो कभी ऊंच-नीच का हवाला देकर भोली जनता को लड़वाते है नेता जी यहां कुछ एक के घरों में ही अमीरी छायी डाॅ, नेता, अभिनेता, ढोंगी बाबा, व्यापारी बाक़ी तो भूखों मर रही है जनता बेचारी जब तक जाति-धर्म और ऊंच-नीच की सियासत में पड़ी रहेगी जनता सारी तब तक यही रियल लाइफ रहेगी भाईयों हमारी

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