चुभने लगे हैं दिखावे के और झूठे रिश्तों के एहसास पल-पल मारतें हैं लहज़े उनके बात करने के अंदाज ये जिंदगी का सफर भी ऐसा ही हुआ है कि अब यहां गैरों से तो क्या हम अपनों से ही हारे हुए हैं आज

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