कभी दहकता कभी सुलगता, अंगारों सा काजल आंखों में लाल अगन सी जलती लाली, शोला सा भड़काए सांसों में जब जब भी मैं करवट बदलू, खाली पलंग चुभे वाहों में तब तब भी मैं रास्ता देखूं , रोकूं सिसकी आंसू आंखों में तुझ से जुदाई की पीड़ा में, मैं कभी सो ना पाऊं रातों में तेरे दरश र्को तरसे अखियां, चौक जाऊ मैं हर आहट में अब तो आजा तू ओ बेदर्दी, बैरागी हो जाऊं तेरी बातों में

2 comments

  1. Ravi Kalra's avatar
    Ravi Kalra · July 9, 2020

    बहुत शानदार

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