तू इंसान नहीं तू नारी है हरपल किस्मत की मारी है तुझे हर कोई ठुकराता है अपना भी नहीं अपनाता है फूलों सा तोड़ा जाता है मां बहन बेटी बनकर तूने त्याग किए अति भारी है तू हरपल किस्मत की मारी है यहां पत्थर को पूजा जाता है और तुझे इंसान इंसान के चरणों में चढ़ाता है और तुझे कोठों की रोनक बनाता है तो तू कभी किसी घर की फुलबारी है तू हरपल किस्मत की मारी है
